धर्म करने की वस्तु नहीं अपितु धर्म जीवन में जीने की वस्तु है – साध्वी श्री रत्नरेखा श्री जी, ऐसा जीवन जिए की जब मृत्यु आए तो वह भी महोत्सव बन जाए – साध्वी श्री रत्नरेखा श्री जी*

Albert Mandoriya, Am Live 24 धर्म करने की वस्तु नहीं अपितु धर्म जीवन में जीने की वस्तु है – साध्वी श्री रत्नरेखा श्री जी, ऐसा जीवन जिए की जब मृत्यु आए तो वह भी महोत्सव बन जाए – साध्वी श्री रत्नरेखा श्री जी *सुश्राविका चंदनवाला बेन गोखरू के विभिन्न तप अनुमोदनार्थ “भक्ति- अमृत महोत्सव” का … Read more

error: Content is protected !!