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धर्म करने की वस्तु नहीं अपितु धर्म जीवन में जीने की वस्तु है – साध्वी श्री रत्नरेखा श्री जी, ऐसा जीवन जिए की जब मृत्यु आए तो वह भी महोत्सव बन जाए – साध्वी श्री रत्नरेखा श्री जी*

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धर्म करने की वस्तु नहीं अपितु धर्म जीवन में जीने की वस्तु है – साध्वी श्री रत्नरेखा श्री जी, ऐसा जीवन जिए की जब मृत्यु आए तो वह भी महोत्सव बन जाए – साध्वी श्री रत्नरेखा श्री जी

*सुश्राविका चंदनवाला बेन गोखरू के विभिन्न तप अनुमोदनार्थ “भक्ति- अमृत महोत्सव” का हुआ आयोजन*

*श्री संघ की ओर से “समाज गौरव रत्न” से किया अलंकृत*

*झाबुआ -स्थानीय जैन तीर्थ श्री ऋषभदेव बावन  जिनालय पर परम पूज्य साध्वी श्री रत्नरेखा श्री जी महाराज साहेब आदि ठाणा 3 की पावनकारी शुभ निश्रा में श्री संघ की वरिष्ठ सुश्राविका श्री मती चंदनवाला बेन गोखरु के विभिन्न तप अनुमोदनार्थ जीवंत भक्ति- अमृत महोत्सव का आयोजन किया गया, इस अवसर पर सामुहिक सामायिक, पंच कल्याणक महापूजन, प्रभु भक्ति , चौवीसी एवं पूज्य साध्वी जी के मंगलमय प्रवचन हुए।*

*श्री संघ के रिंकु रुनवाल ने बताया कि पूज्य साध्वी जी ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि जीवन ऐसा जिए कि हमारी मृत्यु जब आए तो वह भी महोत्सव बन जाए यह भी जीवन जीने की एक कला है, मृत्यु को भी महोत्सव कैसे बनाया जाए  जीवन इस तरीके से जीना ही धर्म है पूज्य साध्वी जी ने धर्म क्रिया के बारे में बताते हुए कहा कि सामायिक, पूजन, प्रतिक्रमण दान- शील- तप – भाव इत्यादि क्रियाएं हैं इस तरीके से धर्ममय जीवन तो जीना है परंतु  प्रतिक्षण धर्म जीवन में रोम रोम में रंग जाए, हमारे व्यवहार में, आचरण में ,बोलने में धर्म झलके वही सच्चा धर्म है, धर्म क्रिया करते ही रहना यह धर्म पूर्ण नहीं है बल्कि धर्म क्रिया करते- करते जीवन में धर्म रम जाए वही जीवन जीने की उत्तम कला है यह कला जिसने सीख ली उसकी मृत्यु जब आएगी तो वह भी महोत्सव बन जाएगी

*भक्ति अमृत महोत्सव पर हुए विभिन्न आयोजन*
*श्री संघ की वरिष्ठ सुश्राविका श्रीमती चंदनबाला बेन भभूतमल जी गोखरु के द्वारा अपने यशस्वी जीवन में की गई विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों, तीर्थ यात्रा , तपस्या , पुजन, व्रत पच्चक्खाण आदि के अनुमोदनार्थ जीवंत भक्ति- अमृत महोत्सव का आयोजन किया जिसके अंतर्गत सुबह श्री आदिनाथ भगवान एवं पार्श्वनाथ भगवान की पंचकल्याणक पुजन, दोपहर में सामूहिक सामायिक का आयोजन,शाम को चौवीसी एवं प्रभु भक्ति का कार्यक्रम रखा गया जिसमें बड़ी संख्या मे समाजजन मौजूद थे।

*“समाज गौरव रत्न” से किया अलंकृत*
श्री संघ के अनिल रुनवाल ने बताया कि श्री संघ की वरिष्ठ सुश्राविका श्रीमती चंदनबाला बेन गोखरु को  उनके जीवन में की गई विभिन्न तप जप एवं धर्म सेवाओं के अनुमोदनार्थ श्री संघ की श्राविका श्रीमती उषा बाठिया ,मंजू पोरवाल एवं जीवनबेन पोरवाल ने तिलक लगाकर माला पहनाई श्री संघ झाबुआ की ओर से शाल श्री फल एवं “समाज गौरव रत्न” के सम्मान से श्री संघ के वरिष्ठ धर्मचन्द मेहता, मनोहरलाल भंडारी, मनोहरलाल छाजेड़ मोहनखेड़ा तीर्थ के ट्रस्टी मांगीलाल पावेचा श्री संघ अध्यक्ष संजय मेहता, प्रदीप रुनवाल, मितेश गादिया, मुकेश नाकोडा ,रत्नदीप सकलेचा, मुकेश रुनवाल, विरेन्द्र सकलेचा,डॉ प्रदीप संघवी, कमलेश कोठारी,अशोक राठौर, नरेन्द्र पगारिया,मनोज नाकोडा, मनोज खाबिया, निखिल भंडारी ,उल्लास जैन अंतिम जैन, राजेश मेहता आदि ने अलंकृत किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में समाजजन मौजूद थे कार्यक्रम का संचालन एवं अभिनंदन पत्र का वाचन श्री संघ अध्यक्ष संजय मेहता ने किया आभार प्रवीण गोखरू ने माना ।

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