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जोसफ मंडोरिया द्वारा प्रस्तुत फौती नामांतरण निरस्त होने पर कैथोलिक मिशन क्यों बौखलाया ।

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Albert Mandoriya, Editor In Chief, Am Live24
झाबुआ । आपको ज्ञात हो कि उक्त कृषि भूमि पर स्व: श्री लेवनार पिता मंडोरिया राजस्व रिकॉर्ड अनुसार वर्ष-1966-70 के पूर्व से उक्त कृषि भूमि पर निवास करते थे एवं कृषि किया करते थे स्व: श्री लेवनार पिता रेमी मंडोरिया की मृत्यु के बाद स्व: श्री लेवनार मंडोरिया की धर्मपत्नी व उनके वारिस पुत्र उक्त कृषि भूमि पर निवासरत हैं एवं आज भी इसी भूमि

पर कृषि करते हैं।

 

विवाद का बढ़ने का कारण जोसफ मंडोरिया के केस हारने के बाद :-

जोसफ पिता पीटर मंडोरिया द्वारा प्रस्तुत फौती नामांतरण निरस्त होने के बाद कैथोलिक मिशन द्वारा दोनों पक्ष बैठ कर चर्चा करेंगे बोलते हुए गुमराह किया गया ।

अल्बर्ट मंडोरिया पत्रकार द्वारा स्वयं उक्त संबंध में चर्चा करने ग्राम पंचायत के सरपंच श्री कलसिंह ग़मार को भेजने पर फादर मुकेश गरासिया, अरविंद पिता फॉरतू मंडोरिया , अन्दरु अमलियार, सुनील पिता पोल मंडोरिया द्वारा किसी भी प्रकार से उक्त संबंध में चर्चा करने से इनकार किया गया। ओर कहा गया कि तुमको जो करना करो हमको कुछ भी फर्क नहीं पड़ता हैं। जबकि हमको मन्दिर परिसर की भूमि से कोई मतलब नहीं था। उक्त परिस्थितियों में उचित कानूनी कार्यवाही जारी रखेंगे ।

इसी कृषि भूमि के पास ग्राम नरवालिया खाता सर्वे नंबर-10 पर कैथोलिक मिशन ईशगढ़ पिपलिया के राजस्व रिकॉर्ड में भूमि दर्ज हैं। एवं ग्राम नरवालिया खाता सर्वे नंबर-10 पर किसी अन्य के सर्वे नंबर पर लगभग वर्ष-1940 से माता मरियम का ग्रोटो (मंदिर) आस्था का केंद्र बना हुआ है। माता मरियम के ग्रोटो से लगा खाता सर्वे नंबर-12 पर स्व: श्री लेवनार पिता रेमी मंडोरिया का मकान बना हुआ था एवं स्व: श्री लेवनार मंडोरिया ने आखिरी सांसे इसी भूमि पर बने मकान में ली थी। खाता सर्वे नंबर-12 की भूमि माता मरियम के मंदिर परिसर से लगी होने के कारण परिसर विस्तार करने हेतु कैथोलिक मिशन ईशगढ़ पिपलिया को हर हाल में उक्त कृषि भूमि छीनने का प्रण ले चुकी हैं इसी कारण कैथोलिक मिशन पिपलिया द्वारा नियुक्त पदाधिकारियों द्वारा स्व: श्री लेवनार मंडोरिया के वारिसों को आए दिन धौंस धमकियां दी जाती हैं।

कैथोलिक मिशन के इस दुर्भावना एवं षड्यंत्र पूर्वक रवैए से स्व: श्री लेवनार मंडोरिया के परिवार में धर्म के नाम पर फूट का कारण बन गई हैं, स्व: श्री लेवनार मंडोरिया के बड़े बेटे द्वारा खराड़ी परिवार से जमीन खरीद कर वही मकान बना कर बस गया और एक ईशगढ़ पिपलिया चर्च के सामने जमीन खरीद कर ससुराल में बस गया । ऐसे में इन दिनों भाइयों को जमीन छीनने से कुछ फर्क नहीं पड़ता। सूत्र : — बताते हैं कि इन दोनों भाइयों को कैथॉलिक मिशन द्वारा लाखों रुपयों का लालच दिया गया है। ताकि ये दोनों भाई मिशन की मिलीभगत से खुद की मां को बुढ़ापे में घर से बेघर कर सके ।

आज उक्त विवादित कृषि भूमि खाता सर्वे नंबर-12 पर स्व: श्री लेवनार मंडोरिया की धर्मपत्नी एवं दो बेटे निवास करते हैं ऐसे में स्व: श्री लेवनार मंडोरिया की मृत्यु के बाद बेबस विधवा का सहारा कौन ? दो बेटों का मां से कहना कि तुम कैथोलिक मिशन से बुराई मत लो फादर मुकेश गरासिया से माफी मांग लो ।
चलो मान ले बुजुर्ग विधवा गलत हो सकती ओर उनके साथ इस कानूनी लड़ाई में साथ चल रहे दोनों बेटे भी गलत है परंतु स्व: श्री लेवनार मंडोरिया की बेसहारा बुजुर्ग धर्मपत्नी जमीन छीनने से कहा रहेगी फुटपाथ पर ओर आखिर उसका क्या गुनाह जो फादर मुकेश गरासिया से माफी मांगे। क्या ईसाई धर्म में खुद के अधिकार के लिए लड़ना गुनाह हैं एवं अपने अधिकार के लिए लड़ना धर्म विरोधी हैं कौनसा धर्म सिखाता की अपने हक अधिकार के लिए कानूनी लड़ाई मत लड़ो।

अगर धर्म इतना जरूरी हैं तो स्व: श्री लेवनार मंडोरिया की धर्मपत्नी जो आज बढ़ती उम्र के साथ-साथ बीमार भी हैं और इसी भूमि से उनके जीवनसाथी स्व: श्री लेवनार मंडोरिया की यादें भी जुड़ी हुई है। ऐसे में कैथोलिक मिशन पिपलिया ओर जोसफ मंडोरिया द्वारा उनको इस उम्र में पिछले 6-7 माह से लगातार आर्थिक एवं मानसिक रूप से धर्म के नाम परेशान करना कहा तक सही हैं।

कैथॉलिक डायोसिस झाबुआ के समस्त पल्ली पुरोहित एवं कैथॉलिक मिशन ईशगढ़ पिपलिया के प्रत्येक व्यक्ति जो ईसाई समाज से हो या अन्य धर्म से सभी यह जानते हैं कि इस कृषि भूमि पर स्व: श्री लेवनार मंडोरिया की धर्मपत्नी एवं उनके वारिस बेटे निवासरत हैं एवं कृषि भी करते हैं। सब कुछ मालूम होने के बाद भी सभी धर्म के नाम पर मौन होकर बेबस को परेशान करने का तमाशा देख रहे हैं। कैथोलिक मिशन ईशगढ़ पिपलिया के फादर श्री मुकेश गरासिया और कुछ पदाधिकारियों की हां में हां मिलते है।

हल्का पटवारी के द्वारा अपनी जांच रिपोर्ट में यह स्पष्ट कर दिया गया है कि सबीना के मृत्यु प्रमाण पत्र के आधार पर जोसफ पिता पीटर मंडोरिया के वारिसों के नाम पर फौती नामांतरण किया जाना संभव नहीं है। पटवारी जांच रिपोर्ट को आधार मानते हुए तहसील न्यायालय के द्वारा जोसेफ मंडोरिया द्वारा प्रस्तुत फौती नामांतरण आवेदन निरस्त किया गया इस प्रकार उक्त भूमि पर पहले भी ओर अब भी जोसेफ पिता पीटर मंडोरिया का कोई स्वामित्व अधिकार नहीं रहा।

आपके बता दे कि राजस्व रिकॉर्ड अनुसार उक्त विवादित भूमि पर सबीना पिता दानियल नाम दर्ज हैं । ओर जोसफ पिता पीटर मंडोरिया एवं कैथोलिक मिशन की मिलीभगत से बनवाया गया मृत्यु प्रमाण- पत्र पर सबीना पिता सकरिया खराड़ी नाम दर्ज हैं। ऐसे में सबीना पिता दानियल कौन है और जोसफ पिता पीटर मंडोरिया की रिश्ते में क्या लगती है आज तक कुछ भी स्पष्ट नहीं हुआ। ओर न ही राजस्व रिकॉर्ड में जोसफ पिता पीटर मंडोरिया या उनके वारिसों का नाम दर्ज है। ऐसे में फादर मुकेश गरासिया द्वारा जोसफ पिता पीटर मंडोरिया से किन आधार पर उक्त विवादित कृषि भूमि खरीदी गई यह जांच का विषय है। चूंकि फादर मुकेश गरासिया द्वारा जोसफ पिता पीटर मंडोरिया को प्रदान किए गया शादी के प्रमाण पत्र पर शादी संपन्न होने का दिनांक तक दर्ज नहीं हैं ऐसे में शादी का सर्टिफिकेट भी संदेह की परिधि में होने से जांच की जाए।

कैथोलिक मिशन एवं जोसेफ मंडोरिया की मिली भगत से शासन प्रशासन को गुमराह करते फर्जी दस्तावेज के आधार पर फौती नामांतरण करवाए जाने की कोशिश आज भी जारी है।

जबकि उक्त सबीना पिता सकरिया खराड़ी के नाम से बना मृत्यु प्रमाण पत्र एवं शादी का सर्टिफिकेट फर्जी है चूंकि जिला निर्वाचन नामावली सूची में जोसफ पिता पीटर मंडोरिया की मृतक धर्मपत्नी स्व: श्रीमती रामाबाई पति जोसफ मंडोरिया निवासी ग्राम पिपलिया में नाम दर्ज हैं। इस प्रकार से जोसफ पिता पीटर मंडोरिया कैथोलिक मिशन द्वारा शासन-प्रशासन को भी गुमराह किया जा रहा हैं।

सूत्र :- बताते है कि कैथोलिक मिशन द्वारा उक्त भूमि के नाम पर लाखों रुपयों जोसफ मंडोरिया को दिए गए जिसके कारण कैथोलिक मिशन जोसफ मंडोरिया के पक्ष में खड़ी है किसी भी हाल में उक्त भूमि छीनने का उद्देश्य है। सूत्र यह भी बताते है कि फादर सिल्वेस्टर मेडा, सेक्रेटरी कैथॉलिक डायोसिस झाबुआ मेघनगर , द्वारा कहा जाता है कि जोसफ पिता पीटर मंडोरिया जमीन कैथोलिक मिशन को बेचने को तैयार हैं पर अल्बर्ट मंडोरिया पत्रकार द्वारा बार-बार आपत्ति दर्ज जाती है। जिसके कारण जोसफ मंडोरिया के नाम भूमि दर्ज नहीं हो पाई ।जमीन का केस तो जोसफ मंडोरिया ही जीतेगा और जमीन उसकी है। ओर हम सब उसी काम में लगे हुए है।

इस प्रकार कैथॉलिक डायोसिस झाबुआ के जिम्मेदारों द्वारा कमजोर वर्ग के आदिवासियों से भूमि छीनने का अभियान चरम सीमा पर है।

अगले अंक में हम फिर मिलेंगे एक नई जानकारी के साथ ।

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